google.com, pub-2645916089428188, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Aapkedwar Delhi News : धर्म संस्कार
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गुरुवार, 21 अगस्त 2025

मघा नक्षत्र पद्म और परिधि- शिव योग के संयोग में शनि अमावस्या 23 अगस्त को

हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का बहुत बड़ा महत्व है।

क्योंकि इस दिन लोग बड़ी संख्या में पवित्र नदियों में स्नान कर  हवन,दान ,पुण्य करते हैं।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि अमावस्या तिथि पित्रों को भी समर्पित होने से खास बन जाती हैं साथ ही इस दिन पितरों का तर्पण पिंड दान करने से जन्म कुंडली में निर्मित  पितृ दोष से मुक्ति मिलती हैं और परिवार में सुख शांति समृद्धि आती है ।

इस दिन शनि मंदिर पहुंचकर शनि प्रतिमा पर सरसों के तेल से अभिषेक  दीपदान आदि करने से शनि की साढ़ेसाती ,ढैया,महादशा- अंतर्दशा से हो रही पीड़ा की शांति होती हैं।

जैन ने कहा इस समय कुंभ राशि वाले पर शनि की आखिरी साढ़ेसाती, मीन राशि वाले पर बीच की और मेष राशि वाले पर शिर पर आती हुई साढ़े साती चल रही है। वही  धनु राशि और  सिंह राशि वाले पर शनि की ढैया चल रही है।

शनि को सभी ग्रहों में न्याय के लिए माना जाता है ये व्यक्ति के कर्मों का हिसाब किताब करते है यदि व्यक्ति अच्छे कर्म करता हैं तो शनि की दशा में उसे बहुत लाभ देते है यानी रंक से राजा भी बना देते है और जिनका कर्म खराब होते हैं  उन्हें शनि की साढ़ेसाती,ढैया, दशा में शनि खराब  फल देकर कर्मों का हिसाब किताब चूकता कर देते है।

शनि अमावस्या के इस दिन इन को भी शनि साढ़ेसाती और ढैया से निजात पाने के लिए पवित्र नदी, तालाब में अथवा गंगा जल युक्त जल से स्नान करके शनि मंदिर पहुंचकर सरसों का तेल , काला वस्त्र,लोहा,जो,काले तिल ,सरसों आदि दान कर दीप दान आदि करना चाहिए।

जैन के अनुसार मघा नक्षत्र, पद्म योग,परिधि - शिव योग का संयोग इस वार 23 अगस्त शनिवार को बना हुआ है।अमावस्या तिथि 22 को दिन के 11:55 पर आरंभ होकर 23 अगस्त  शनिवार को  दिन के 11:35 बजे तक रहेगी।

उदया तिथि 23 अगस्त शनिवार को होगी इसलिए शनिवार को शनिश्चरी अमावस्या पूरे दिन मनाई जाएगी।

जैन ने बताया इस वार पूरे विक्रम संवत् 2082 में अर्थात एक वर्ष में केवल एक ही बार शनि अमावस्या भाद्रपद कृष्ण पक्ष की 23 अगस्त शनिवार को रहेगी।

शनिवार, 9 अगस्त 2025

इस बार श्रवण नक्षत्र,शनि के त्रियोग भद्रा रहित सर्वार्थ सिद्धि योग में बंधेगा रक्षासूत्र

बहिनों को  श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि का इंतजार लंबे समय से रहता है क्योंकि इस दिन उन्हें अपने मायके जाने का मौका मिलता है अपने परिवार के साथ बैठ कर खुशियां साझा करती हुई अपने भाइयों की कलाई पर उनके दीर्घ आयु की कामना के साथ राखी बांधती है और आजीवन भाई अपनी बहिन की रक्षा के लिए बचन देता है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य  डॉ हुकुमचंद हैं ने बताया कि इस बार का रक्षाबंधन का पर 09 अगस्त शनिवार को उदया तिथि पूर्णिमा में श्रवण नक्षत्र एवं मकर राशि में चंद्रमा के रहने से मकर राशि के स्वामी भी शनि है अर्थात शनि के त्रियोग में मनाया जाएगा।श्रवण नक्षत्र के अधिपति विष्णु इस दिन सौभाग्य योग भी है इसके अधिपति ब्रह्मा जी है अतः यह पर्व ब्रह्मा - विष्णु जी की साक्षी में पूर्ण हाने से और ज्यादा पावन होगा 

हैं ने कहा इस बार  भद्रा का साया भी नहीं है अक्सर रक्षा बंधन के दिन भद्रा हुआ करती थीं तब भद्रा के समय राखी बांधना और होली जलाना शास्त्रीय निषेध है।

इस बार भद्रा  शुक्रवार की रात्रि 01:52 बजे समाप्त हो रही है इस लिए शनिवार को रक्षाबंधन का पर्व निर्विघ्न संपन्न होगा।

राखी बांधने का समय :- 09 अगस्त शनिवार उदया  पूर्णिमा तिथि में प्रातः 05:47 बजे से दोपहर 13:24 बजे पूर्णिमा तिथि रहते तक पूरे समय बहिनें अपने भाइयों  की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

ग्रहो के राजा सूर्य ने किया कर्क राशि में प्रवेश चमकेगी कुछ राशि वाले की किस्मत

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। सूर्य पिता, आत्मा, मान-सम्मान व साहस के कारक माने गए हैं। 16 जुलाई को शाम 17:30 बजे सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे। 

कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं यह जल तत्व राशि है सूर्य अग्नि तत्व है। सूर्य का कर्क गोचर मानव जीवन के साथ सभी 12 राशियों को प्रभावित करेंगे। सूर्य राशि परिवर्तन से कर्क, सिंह समेत पांच राशियों वाले की किस्मत चमकेगी।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि सूर्य यू तो हर माह एक राशि में प्रवेश करता ही है।

इस राशि प्रवेश को सूर्य की संक्रांति कहते हैं।

हालांकि सूर्य की मकर संक्रांति को लोक में सभी जानते हैं क्योंकि यह संक्रांति धार्मिक मान्यता ,स्नान,दान के रूप में प्रसिद्ध हैं साथ ही इस समय से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो कर बड़े होने लगते हैं।

सूर्य की कर्क संक्रांति का भी महत्व है ।इस समय सूर्य दक्षिणायन की तरफ गति करता है। दिन छोटे राते बड़ी होने लगती है।

साथ ही कर्क चल तत्व,चार, और  स्त्री संज्ञक राशि में रहने सर्वत्र वर्षा विशेष रूप से होती रहती हैं। जैन ने कहा सूर्य एक माह चंद्रमा की राशि कर्क में रहेगा और कुछ राशियों की किस्मत पर बहुत अच्छा प्रभाव तो कुछ पर विपरीत असर के साथ व्यापारिक वस्तुओं की तेजी मंदी  को प्रभावित  करेगा।

*राशियों पर इसका असर*

मेष -मेष राशि वालों के लिए चौथा सूर्य चलने से इन्हें हर कार्य में सावधानी रखनी होगी परिवार में संघर्ष बढ़ सकता है इससे बचने का प्रयास करें।

वृष -वृष राशि वालों के लिए तीसरे भाव में सूर्य का चल ना उनके पराक्रम को बढ़ाया अपने रुक कारण को पूरा कराएगी और प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त होगी। 

मिथुन - मिथुन राशि में दूसरे भाव में प्रवेश से आर्थिक लाभ पारिवारिक उन्नति होगी।

कर्क -प्रथम चलने से ऊर्जावान और आत्म विश्वास बढ़ेगा नया कार्य प्रारंभ होगा।

सिंह - सिंह राशि में 12 वे भाव में प्रवेश करने से खर्चा अधिक होगा । वे वजह विवाद हो सकते हैं।

कन्या राशि - किसी की बातों में न आए समाज में दायरा बढ़ेगा।

तुला - दशवे भाव में सूर्य पद,प्रतिष्ठा,नया कार्य जिम्मेदारी मिलेगी।

वृश्चिक - धार्मिक ज्ञान गुरुजनों का साथ मिलेगा तीर्थ स्थल की यात्रा हो सकती है।

धनु राशि - आठवें सूर्य चलने से श्रम ,साधना ,समझदारी से फैसले करे तो सफल रहेंगे।

मकर - जीवन साथी यानी पत्नी को सफलता ,लाभ ,विवाह की बात शुरू हो सकती हैं।

कुंभ - स्वास्थ्य उत्तम रहेगा,रुके कार्यों को गति देंगे और कार्यों में बदलाब ला सकते है।

मीन - संतान को प्रतियोगिता,परीक्षा में सफलता,उन्नति रुका धन प्राप्ति हो सकती है। उत्साह बढ़ेगा।

जैन के अनुसार कर्क राशि में सूर्य के प्रवेश से गेहूं, चना, चावल,जो,मूंग, मोठ,उड़द,सोना, चांदी,बादाम,सुपारी में तेजी आ सकती हैं।

वायु प्रबलता से अति वर्षा  बाढ़ से फसलों  एवं जन धन की कई स्थानों पर  बड़ी मात्रा में हानि देखने मिल सकती हैं।

गुरुवार, 10 जुलाई 2025

इस बार खास योग रहेंगे हर सोमवार को चतुर्थी व्रत के साथ होगी श्रावण के पहले सोमवार की शुरुवात

 

शिव जी का प्रिय माह श्रावण की शुरुवात 11 जुलाई शुक्रवार से होगी।

शिव जी के भक्त श्रावण माह में शिव जी की उपासना आराधना बड़ी भक्ति भाव से करते है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार हर सोमवार को खास योग रहेगा  श्रावण का पहला सोमवार 14 जुलाई को चतुर्थी के दिन पड़ेगा। चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात्रि 10:10 बजे होगा इसलिए खास वन सोमवार व्रत होगा।

दूसरा सोमवार 21 जुलाई को कामिका एकादशी व्रत वाले दिन पड़ने से खास होगा क्योंकि एकादशी के व्रत के साथ इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी रहेगा।

तीसरा सोमवार व्रत 28 जुलाई दुर्वागणपति चतुर्थी के दिन पड़ने से वन सोमवार व्रत  खास होगा।

चौथा सोमवार व्रत 04 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग में वन सोमवार व्रत होगा पड़ने से खाश होगा ।

श्रावण माह के महीने में भगवान शिव सृष्टि का संचालन करते हैं। माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकारा तभी से श्रावण माह में शिव जी एवं मां पार्वती की पूजा अर्चना  करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

व्यक्ति के शरीर और मन की शुद्धि होती हैं।

जैन ने कहा जिनकी जन्म कुंडली में कालसर्प योग है,पितृ दोष हो शनि,राहु या केतु की महादशा - अंतर्दशा चल रही हो उन्हें तो अवश्य ही श्रावण के सभी सोमवार को व्रत रखकर विधि विधान से पूजन करना चाहिए। इससे सभी कष्ट दूर होते है।

जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं

  

आषाढ़ माह की पूर्णिमा के दिन हर वर्ष गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ. हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार गुरु पूर्णिमा 10 जुलाई गुरुवार को है गुरुवार के दिन गुरु पूर्णिमा होने से  विशेष महत्व की है क्योंकि गुरुवार गुरु का गुरु ग्रह से संबंधित है।

 गुरु ग्रह ज्ञान शिक्षा, दीक्षा, अध्यात्म से जुड़ा हुआ ग्रह है जैन ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में गुरु बनाना चाहिए जब तक गुरु जीवन में नहीं तब तक जीवन सही मायने में शुरू नहीं वैसे तो मनुष्य के जन्म से ही गुरु रहते हैं।

 प्रथम गुरु बच्चों की मां होती है जिसने जन्म दिया फिर शिक्षक जिन्होंने शिक्षा प्रदान की उसके बाद आध्यात्म  को बताने वाले आत्म ज्ञान देने वाले गुरु कहलाते हैं।

 जैन ने कहा कि हमें किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए गुरु बनाना ही पड़ता है बिना गुरु के संस्कार और फिर ज्ञान प्राप्त नहीं होता गुरु पूर्णिमा के दिन सभी को अपने गुरुओं का पूजन कर उनका गुणगान करना चाहिए।

इस दिन प्रात स्नान करके भक्ति भाव के साथ स्वच्छ वस्त्र धारण कर अपने गुरु के पास फल फूल वस्त्र माला द्रव्य आदि लेकर प्रसन्न मन से जाना चाहिए गुरु के पाद प्रक्षालन कर तिलक लगाकर पुष्प माला पहनकर पूजन कर आशीर्वाद लेना चाहिए ऐसा करने से मनुष्य के सभी रोग शोक,भय  समाप्त होकर मन में अच्छे विचार एवं  संस्कार मिलते हैं और उसे शांति आनंद की अनुभूति के साथ ज्ञान की प्राप्ति होती है।

शनिवार, 24 मई 2025

नौ तपा 25 मई रविवार से 2 जून सोमवार तक

हर साल नौ तपा मई माह के लास्ट दिनों  में आते हैं। ये दिन खूब गर्मी ,लू चलती है। एक मान्यता के अनुसार नौ तपा में जितने तपन रहती हैं लू चलती हैं और वर्षा न हो तो आगे उतनी ही अच्छी वर्षा होती हैं।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्रहों के राजा  सूर्य ग्रह जब वृष राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते है  तब से नौ तपा शुरू होते हैं हालांकि रोहिणी नक्षत्र में सूर्य लगभग 14 दिनों तक रहते हैं। 

शुरू के  नौ दिनों में सूर्य की किरणे अपना विकराल तेज से पृथ्वी को गर्म तवे के समान तपाती है । इससे भीषण गर्मी और लू का आभास होता हैं ।समुद्र का पानी भी तेजी से वाष्पित होता है और आगे पुनः वर्षा के रूप में वर्षता है।

 जैन ने कहा कि नो दिनों के अलावा  जब तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 08 जून तक  रहेगा तब तक गर्मी, लू इस वार कम नहीं होगी और भयंकर गर्मी, लू के थपेड़े रहेंगे।

हाला कि नौ तपे के दिनों में कुछ कुछ स्थानों पर धूलभरी आंधी तूफान आएंगे कही  कही इस के साथ वर्षा भी होगी। आंधी के साथ वर्षा की संभावित तारीखें 28,30,31 मई हो सकती हैं।

कब शुरू होगा नौतपा

पंचांग के मुताबिक 25 मई 2025 को ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। वह इस दिन सुबह 03 बजकर 27 मिनट पर गोचर करेंगे। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून 2025 तक रहने वाले हैं।

शुक्रवार, 23 मई 2025

केवल आठ जून तक बजेगी शहनाई

 लगभग पांच माह के लिए रहेगा विराम

अक्सर कर देवशयन एकादशी के पहले तक विवाह मुहूर्त होते हैं इनमें भंडली नवमी को अबूझ मुहूर्त होता है लेकिन इस बार ऐसा नहीं है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार 12 जून  25 को गुरु पश्चिम  दिशा में अस्त हो जाएगा जो 06 जुलाई 25 को गुरु पूर्व दिशा में उदय होगा।

गुरु तारा अस्त के तीन  दिन पहले से गुरु वृदित्वकाल एवं  उदय से तीन दिन तक बाल्यत्व काल विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

कहते हैं कि उत्तम दाम्पत्य जीवन के लिए विवाह वाली कन्या की राशि से गुरु ग्रह बलवान होना आवश्यक है। गुरु बलहीन होने पर दाम्पत्य जीवन में अनेक कठिनाइयां हर तरह से आती है इसलिए गुरु के अस्त समय में विवाह मुहूर्त शास्त्र युक्त नहीं होता और यही वजह हैं कि इस समय कोई विवाह नहीं करना चाहिए।

जैन ने कहा कि 06 जुलाई 25 से आषाढ़ शुक्ल एकादशी रविवार से कार्तिक शुक्ल एकादशी रविवार 02 नवंबर 25 तक हरिशयन काल का समय रहने से शहनाई नहीं बजेगी।

अगला शुभ व शुद्ध विवाह मुहूर्त 22 नवंबर 25 को है।

इस साल के शेष मुहूर्त :- मई में 28 

 जून - 02,04,07,08

नवंबर में 22,23,24,25,30 को मुहूर्त है।

दिसंबर माह में केवल दो मुहूर्त ही हैं।

04,05 दिसम्बर को

सोमवार, 19 मई 2025

चार बड़े ग्रहों का बदलाव लंबे समय तक करेगा प्रभाव

 

कहते है  ग्रह ही राज्य देते है और ग्रह ही राज्य हर लेते हैं  सभी  चराचर ग्रहों के ही अधीन हैं।

चार दिनों में ग्रहों का राजा सूर्य ने 15 मई की रात मेष राशि से वृष राशि में प्रवेश किया, ग्रहों में सबसे अधिक ज्ञान,ध्यान,शिक्षा दीक्षा के कारक गुरु ने 14 मई की रात वृष से मिथुन में प्रवेश किया अब 18 मई को शाम 07:20 बजे राहु मीन राशि से कुंभ में इसी समय केतु कन्या राशि से सिंह राशि में प्रवेश कर रहे है।

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने कहा कि इन ग्रहों के परिवर्तन जिन राशियों में ग्रह पहुंच रहे है उन्हें बड़ी परेशानी रहेगी।

इस के अलावा बुध 16 मई  से 12 जून तक अतिचारी गति चलने से राजनेताओं में परस्पर टकराव बढ़ेगा देश के पश्चिमी उत्तरी क्षेत्रों में हिंसा, दुर्भिक्ष की संभावना रहेगी। जनता में भय बना रहेगा।

तेल,तिलहन काली मिर्च, किराने का सामान में तेजी आएगी। चांदी एक लाख से ऊपर ही अच्छी तेजी में रहेगी। जैन ने कहा कि प्रत्येक राशि भी प्रभावित होगी।

क्या होगा राशियों पर असर

प्रत्येक राशियों पर अलग-अलग रूप से प्रभाव पड़ेगा। 

18 मई को शाम 07 बजकर 20 मिनट पर राहु अपनी स्वभाविक गति यानि वक्री गति से कुंभ राशि में और केतु अपनी वक्री गति से सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और वर्ष पर्यंत राहु, कुंभ राशि में और केतु सिंह राशि में ही गोचर करते रहेंगे। राहु और केतु एक राशि में लगभग 18 महीनों तक रहते हैं।गुरु एक राशि में  लगभग 13 महीने तक  रहते हैं।गुरु,राहु और केतु के इस गोचर का आपकी राशियों पर और आपके जीवन पर क्या प्रभाव होगा।

मेष राशि

गुरु आप के तृतीय ,राहु आपके ग्यारहवें स्थान पर, जबकि केतु आपके पांचवें स्थान पर गोचर करेंगे इनके प्रभाव से आपके जीवन में धन लाभ ,मान सम्मान के अवसर सामने आ सकते हैं। किंतु संतान क्या कैसे कर रही है उसपर ओर जीवन साथी  पर ध्यान देना होगा।

 वृष राशि 

गुरु आप के द्वितीय ,राहु  दसवें, केतु आपके चौथे स्थान पर गोचर करेंगे। परिवार में वृद्धि,धन वृद्धि परंतु केतु चौथे मां  को रोग पीड़ा अशांति देगा।

  जीवनसाथी और दोस्तों से आपको विशेष सहयोग मिलेगा। 

 मिथुन राशि 

 गुरु प्रथम,राहु नवें स्थान पर,  केतु  तीसरे स्थान पर गोचर करेंगे। गुरु विलंब और भय से कार्य करने देंगे राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से धार्मिक कार्यों के प्रति आपकी रुचि कुछ कम हो सकती है। आपको जीवनसाथी और संतान का लाभ मिलेगा। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलने के पूरे चांस नजर आ रहे हैं।  

 कर्क राशि 

 गुरु बारहवें स्थान पर राहु आपके आठवें स्थान पर, जबकि केतु आपके दूसरे स्थान पर गोचर करेंगे। गुरु से शत्रुओं पर विजय गुप्त व साहसी कार्य पूर्ण होंगे राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से आपको स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा व्यावसायिक दृष्टि से आपको थोड़ा संभलकर काम करना चाहिए।

सिंह राशि 

 गुरु देव ग्यारहवें स्थान पर राहु  सातवें स्थान पर, जबकि केतु आपके पहले यानि लग्न स्थान पर गोचर करेंगे।

गुरु से नए आर्थिक लाभ उन्नति,नौकरी में पदोन्नति  राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से जीवनसाथी के साथ आपके रिश्ते बहुत अच्छे नहीं रहेंगे। व्यवसाय में कभी कभी देरी रुकावटें।

कन्या राशि

 गुरु दशमे,राहु  छठे स्थान पर, जबकि केतु  बारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। मित्रो से मत भेद स्थान हानि,स्थान परिवर्तन राहु-केतु  से  ही व्यर्थ के खर्चों पर भी नियंत्रण रखने की जरूरत है। इस दौरान किसी भी काम को टालने से आपको बचना चाहिए।

तुला राशि

 गुरु नवें स्थान पर,राहु आपके पांचवें स्थान पर, जबकि केतु आपके ग्यारहवें स्थान पर गोचर करेंगे। संतान की उन्नति,धन लाभ रुके कार्य गुरु पूर्ण कराएंगे।राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से आपको कारोबार में अचानक लाभ । 

 वृश्चिक राशि- 

गुरु देव आठवें स्थान पर,राहु आपके चौथे स्थान पर, जबकि केतु आपके दसवें स्थान पर गोचर करेंगे। 

स्वास्थ्य का खाश ध्यान रखना होगा।राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से आपको पारिवारिक सुख में कमी महसूस हो सकती है। आपको इस दौरान अपने विरोधी पक्ष से थोड़ा सावधान रहना चाहिए। इसके अलावा आपको अपनी माता की सेहत का ख्याल रखना चाहिए।

 धनु राशि- 

गुरुदेव सातवें स्थान पर,राहु आपके तीसरे स्थान पर, जबकि केतु आपके नवें स्थान पर गोचर करेंगे।

विवाह,पत्नी सुख के लिए  उत्तम वर्ष है कार्य व्यापार से आर्थिक लाभ, उन्नति।

राहु-केतु के इस गोचर भी  आपको जीवन में लाभ और सफलता मिलेगी। परिवार के लोगों से, खासकर कि संतान से आपको सहयोग मिलेगा। नौकरी के क्षेत्र में आपकी तरक्की होगी। 

 मकर राशि

 गुरुदेव छठे स्थान पर,राहु आपके दूसरे स्थान पर, जबकि केतु आपके आठवें स्थान पर गोचर करेंगे।पुत्र से मतभेद एवं इस दौरान आपको पैसों के मामले में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। अपने काम की बागडोर अपने हाथ में रखना आपके लिए ज्यादा अच्छा होगा। परिवार के मामले में भी किसी तीसरे व्यक्ति से कोई राय न लें, तो बेहतर रहेगा।

 कुंभ राशि

गुरु देव पांचवें ,राहु आपके पहले यानि लग्न स्थान पर, जबकि केतु आपके सातवें स्थान पर गोचर करेंगे। गुरु के प्रभाव से आप की तर्क शक्ति सूझबूझ बढ़ेगी कार्यों में सफलता धन का सही उपयोग होगा।

राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से आपको अपने कार्यों की पूर्णता के लिए थोड़ी ज्यादा मेहनत और लगन की जरूरत है। इस दौरान आपको अपने कार्य ईमानदारी के साथ पूरे करने चाहिए। 

 मीन राशि

गुरु चतुर्थ स्थान पर,राहु आपके बारहवें स्थान पर, जबकि केतु आपके छठे स्थान पर गोचर करेंगे।

गुरुदेव के प्रभाव से परिवार मित्रो से अशांति महशूस  होगी स्थान परिवर्तन भी हो सकता है।राहु-केतु के इस गोचर के प्रभाव से आपको कभी-कभी धन हानि होगा, तो कभी-कभी अचानक से आपके खर्चें बढ़ सकते हैं। सेहत के मामले में इस दौरान आपको अपनी आंखों और गले का खास ध्यान रखना चाहिए। 

साथ ही अपने महत्वपूर्ण काम करते समय आपको अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।

शनिवार, 26 अप्रैल 2025

चौंकाने वाली भविष्यवाणियां करते हैं ज्योतिषाचार्य डॉ जैन

15 अप्रैल के आपके द्वार न्यूज चैनल में ग्वालियर के ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने नव संवत्सर और वैशाख माह  के साथ खप्पर योग निर्मित हो रहा है के अशुभ प्रभाव से बताया था कि हिंसा,प्राकृतिक आपदा ,एवं राजनैतिक  विचित्र घटनाओ, दुर्घटनाओ को यह योग जन्म देगा और अपनी कोई न कोई बड़ी अमिट छाप  छोड़कर जाएगा।

अभी वैशाख मास को 15 दिन भी नहीं बीते  बेमौसम बादलों का फटना, बंगाल में हिंसा का बढ़ाना,मुंबई में जैन मंदिर पर विलडोजर चलाकर टूटना,भूकंप का आना और कश्मीर में बड़ी दर्दनाक आतंकी हिंसा ने पूरे देश को हिला कर रख दिया ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर आतंकवाद पर पूर्ण विराम कैसे लगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन लगभग तीन दशक से ज्योतिष के माध्यम से भविष्यवाणियां करते आ रहे हैं इनकी दर्जनों भविष्यवाणियां सत्य सिद्ध हुई हैं।

शुक्रवार, 18 अप्रैल 2025

देव शयन काल से एक माह पहले ही यानी साढ़े पांच माह इस वार विवाह मुहूर्त पर रोक लगेगी

कुछ लोग अधिक गर्मी की वजह से मई ,जून की बजाय जुलाई महीने में विवाह बंधन में बंधना चाहते हैं उनके लिए इस बार ऐसा नहीं हो पाएगा क्योंकि इस बार देव सोने से लगभग एक माह पहले से ही विवाह मुहूर्तों पर रोक लगा जाएगी।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि अमूमन विवाह मुहूर्त आषाढ़ शुक्ल  एकादशी  अर्थात देव शयन एकादशी से पहले तक लगभग मध्य जुलाई तक रहते है। 

लेकिन इस बार जो लोग यह सोचकर बैठे हैं कि जून के लास्ट और जुलाई के फास्ट वीक में विवाह के मुहूर्त निकाल लेंगे उनके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि इस बार विवाह मुहूर्त पर चार माह की जगह पांच माह रोक रहेगी।

 ज्योतिषाचार्य डॉ जैन ने इस कारण बताते हुए कहा कि इस बार गुरु तारा 12 जून  आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा तिथि गुरुवार को पश्चिम दिशा में अस्त होगा जो 06 जुलाई आषाढ़ शुक्ल एकादशी रविवार यानि देवशयनी एकादशी के दिन ही पूर्व दिशा में उदय होगा । गुरु अस्त कालांश एवं अस्त से 3 दिन पूर्व यानी वृद्वत्वकाल एवं उदय से 3 दिन बाद बाल्यत्वकाल तक शास्त्र युक्त विवाह मुहूर्त नहीं होता 02 नवंबर  को देवप्रबोधिनी एकादशी है  देवप्रबोधनी एकादशी और भड़ली नवमी को लोकाचार की दृष्टि से विवाह किए जा सकते हैं।

इसके अलावा  22 नवम्बर को ही शुद्ध विवाह मुहूर्त की अगले सीजन की शुरुआत होगी।

इस सीजन के शेष शुद्ध विवाह मुहूर्त:- 

अप्रैल - 14,16,18,20,21,25,29,30 मई - 05,06,07,08,13,17,28,

जून - 02,04,07,08

 नवंबर - 22,23,24,25,30

दिसंबर - 04

शुक्रवार, 28 मार्च 2025

हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् 2082 वर्ष के राजा एवं मंत्री सूर्य होंगे

 जल स्तंभ  85.37 प्रतिशत वर्षा अच्छी होगी

हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् की शुरुवात चैत्र कृष्ण अमावस्या  तिथि की समाप्ति 29 मार्च दिन में 04:26 बजे पर होगी इस के साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी इसी समय से चंद्रमान से हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् 2081 समाप्त होकर श्री श्री विक्रम संवत् 2082 प्रारंभ हो जायेगा।

नव रात्रि घट स्थापना 30 मार्च  रविवार को प्रातः सूर्योदय  06:11 बजे से 10:18 बजे तक फिर अभिजीत मुहूर्त में 11:57 12:47 के बीच श्रेष्ठ है। इस दिन सभी को प्रातः जल्दी उठकर स्नान ध्यान करके साफ नए वस्त्र पहन कर अपने अपने घरों पर ध्वज फहराना चाहिए और वर्ष भर उन्नति के लिए ईश्वर से पूजन ,प्रार्थना,अपने अपने धर्मानुसार अवश्य करना चाहिए ।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी बताया 

इस बार श्री विक्रम संवत्सर 2082 का नाम सिद्धार्थी है स्वामी सूर्य है जनता में ज्ञान वृद्धि करता है।

इस वर्ष 04 स्थान सौम्य ग्रहों को और 06 स्थान पाप और  उग्र ग्रहों को प्राप्त हुए हैं।इस वर्ष का जल स्तंभ 85.37% होने से वर्षा की अधिकता रहेगी अनेक स्थानों पर बाढ़ का खतरा रहेगा जिससे फसलों को हानि होगी।

तृण स्तंभ 100% होने से पशु चारा भरपूर होगा। वायु  स्तंभ 10.75% होने से वातावरण में वायु की गति कम रहेगी इससे उमस रहेगी मच्छर,कीड़े मकोड़े का प्रकोप बढ़ेगा। अन्न स्तंभ 21.69% है जो कि कम है अनाज उत्पादन की कमी दर्शाता है अधिक वर्षा से अनाज की फसल नष्ट होने से उनके मूल्य वृद्धि रहेगी । गेहूं,चना, जौ,चावल के मूल्य ऊंचे रहेंगे।

*वर्ष के दशाधिकारियों के फल* :--  जैन के अनुसार 1. वर्ष का राजा सूर्य होने से अनेक स्थानों पर वर्षा की कमी, मनुष्य व पशुओं में रोग ,अग्नि व चोरी की घटनाएं बढ़ेगी किसी वरिष्ठ  शासक या नेता का निधन।

2. मंत्री सूर्य का फल - शासकों में आपसी विरोध आरोप प्रत्यारोप बढ़ेगा रोग,चोरी भय गुड़ और रसादि पदार्थों के मूल्य वृद्धि रहेगी।

3. सस्येश बुध  का फल - ग्रीष्म ऋतु की फसलें गेहूं,चावल,गन्ना इत्यादि भरपूर  उपज होती हैं वर्षा अधिक होती है सुख साधनों की वृद्धि विद्वान धर्म पारायण प्रवृत्ति रहे।

4. धान्येश चंद्रमा का फल - सर्दियों में होने वाली फसलें मूंग, मोठ , बाजरा,सरसों आदि  अच्छी हो दूध पर्याप्त मात्रा में होता है जनसंख्या में वृद्धि हो।

5. मेघेश सूर्य का फल - वर्षा कम होगी महंगाई चरम पर होगी राजनीतिज्ञों में आपसी विरोध चरम पर चोरी ठगी, भ्रष्टाचार बढ़ेगी गेहूं,चना, जौ चावल,गन्ना की फसलों अधिक होगी।

6. रसेश शुक्र का फल - शुभ,मांगलिक, धार्मिक आयोजन अधिक होते है कुछ स्थानों पर वर्षा की कमी।गुड़,खांड,रसकस ज्यादा हो शासक  वर्ग सुचारू रूप से चलता है।

7.  नीरसेश बुध का फल -  रोज मर्रे की वस्तुएं  रेडीमेड कपड़े होजरी का सामान,शंख,चंदन,सोना,चांदी, तांबा आदि धातुएं,रत्न महंगे होते हैं। 

8. फलेश शनि का फल पेड़ो में फलों की कमी। शीत प्रकोप, हिमपात से हानि रोग,चोरी से जनता की परेशानियां बढ़ेगी।

9. धनेश  मंगल का फल - गेहूं, चना,  धान्य आदि की फसलें असमय वर्षा से खराब होती हैं।व्यापार में उतर चढ़ाव विशेष प्रशासन से जनता दुःखी हो।

10. दुर्गेश शनि का फल - पश्चिमी देश प्रांतों में हिंसा अशांति से जनता त्रस्त रहकर अन्य स्थानों पर पलायन करती हैं।नागरिकों को शत्रु भय । टिड्डी ,चूहों से फसलों की हानि होती हैं।

मंगलवार, 17 दिसंबर 2024

सूर्य के रथ खींचने लगे खर , नहीं होंगे विवाह आदि शुभ कार्य


भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ ऋतुओं के साथ जुड़ी हुई गुथी हुई हैं। इस वजह से व्यवहारिक कार्यों को त्यौहार, मुहूर्तों से करने के विधान शास्त्रों में निहित है।

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि खर मास साल में दो बार आता है । जब जब सूर्य  गुरु की राशि में धनु और मीन में गोचर करते हैं वह अवधि को खरमास के नाम से जाना जाता है। खरमास की अवधि 30 दिन की होती है धनु खरमास  और मीन खर मास प्रारंभ हो चुका I   

धनु खरमास 15 दिसंबर की रात्रि 22:09 बजे से सूर्य ने धनु राशि में प्रवेश किया है यह 14 जनवरी को प्रातः 8:00 बज कर 54 मिनट तक रहेगा  धनु राशि में रहने से सौर पौष धनु खरमास रहेगा।  

 सूर्य देव के रथ को निरंतर सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है। लगातार घोड़े का रथ में चलने से घोड़े को थकान हो जाती है और उनको थोड़ा विश्राम के लिए छोड़ दिया जाता है ।इस अवधि में सूर्य का रथ लगातार चलने के कारण उसमें खर यानी गधों को रथ में जोत दिया जाता है यह 30 दिन तक खर यानी गधे रथ को धीमी गति से  खींचते हैं इस  वजह से खरमास में सूर्य का तेज कम हो जाता है सूर्य की  चाल काफी ज्यादा धीमी हो जाती है  इसलिए खरमास में शादी विवाह गृह प्रवेश देव प्रतिष्ठा मुंडन  आदि शुभ, मंगल कार्य को शास्त्रों के अनुसार वर्जित रखा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में शुभ मंगल कार्यों के करने से उनका सुख उनका  पूरा फल नहीं मिल पाता इसलिए इस समय धार्मिक कार्य  आदि करना चाहिए।

जैन ने बताया खरमास और मलमास में अंतर होता है खरमास सूर्य के धुन और मीन राशि में प्रवेश करने से हर वर्ष में दो बार आता है जबकि मलमास 3 वर्ष में एक बार आता है। 

 चंद्रमा को पृथ्वी के 12 चक्कर लगाने में 355 दिन का समय लगता है पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन का समय लगता है इस तरह हर साल चंद्र वर्ष और सूर्य वर्ष में लगभग 10 दोनों का अंतर आ जाता है इसी अंतर को दूर करने के लिए अधिक मास या पुरुषोत्तम मास की व्यवस्था की गई है ताकि व्रत, त्यौहार निश्चित ऋतु में मनाई जा सके अगर ऐसा ना हो तो सभी  त्योहारों के और रितु परिवर्तन समय में काफी अंतर आ सकता है।

रविवार, 1 दिसंबर 2024

बाबा की नेतागिरी पर बाबाजी की सीख

 

मै धीरेन्द्र शास्त्री को कभी गंभीरता से नहीं लेता। धीरेन्द्र अभी हमारी नजर में ' बाबा '[बच्चा] ही है ,लेकिन कुछ बच्चे समय से पहले परिपक्व हो जाते हैं ,इसलिए पढ़ाई-लिखे के बजाय  बाबागिरी पर उतर आते हैं। धीरेन्द्र शास्त्री भी उन्हीं बच्चों में से एक है।  उनके सितारे अभी बुलंद हैं और इसी के आधार पर वे हिन्दू हृदय सम्राट बन जाने की जल्दबाजी में है।  उन्हें धूर्त राजनीतिज्ञों ने अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू हृदय सम्राट बनाने में कोई कसर छोड़ी भी नहीं है ,लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सही समय पर बाबा धीरेन्द्र  को सही तरीके से डपट दिया।
धीरेन्द्र शास्त्री पर लिखने का   मेरा कोई मन नहीं था,लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानद बोले तो मुझे भी लिखना पड़ा ।  बाबा धीरेन्द्र ने हाल ही में सनातन हिन्दू एकता यात्रा निकाली ।  इस यात्रा में खूब भीड़ उमड़ी  ।  तमाम बाबा इसमें शामिल हुए ।  इनमें फ़िल्मी दुनिया के बाबा और कथावाचक बाबा भी शामिल हुए। बेरोजगारों की  भीड़ को तो इसमें शामिल  होना ही था। बाबा ने सड़क पर चुकट्टों में चाय सुड़ककर आम आदमी होने का खूब तमाशा किया। मीडिया के लिए बाबाओं की ये बाबागीरी बड़े काम की साबित हुई । टीवी चैनलों को अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसे ही तमाशों की जरूरत होती है। बाबाओं को पैसे देकर फ़िल्मी बाबा भी बुलाने पड़ते हैं। वरना फ़िल्मी बाबा ' चिरी ऊँगली पर न मूतें '।  
बहरहाल बात हम शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानद जी की कर रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानद भी कांग्रेसी शंकराचार्य के रूप में बदनाम स्वामी स्वरूपानंद  सरस्वती जी के उत्तराधिकारी है।  वे अयोध्या के  राम मंदिर  में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी नहीं गए थे , मुकेश अम्बानी के बेटे की शादी में गए थे ।  लेकिन उन्होंने फिर भी एक मार्के की बात कही है कि बाबा धीरेन्द्र शास्त्री राजनीतिक शक्ति के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।  हम भी यही सब कहते तो हमें शहरी नक्सल या वामपंथी कहकर अनसुना करने की कोशिश की जाती ,लेकिन जब यही बात एक शंकराचार्य जी कह रहे हैं तो उसका कुछ महत्व बनता है। शास्त्री के मुकाबले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को हैसियत बड़ी है।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ,जिन्हें बुंदेलखंड के धर्मभीरु लोग बागवश्वर बाबा कहते हैं , अपनी यात्रा के आरम्भ से अंत तक उत्तर प्रदेश के बाबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चुनाव मंत्र ' बटोगे तो कटोगे ' का जाप करते आये।  उन्होंने अपने आपको प्रगतिशील बताने के लिए जाति-पांत का भी विरोध किया ,लेकिन बाबा धीरेन्द्र   शास्त्री उन बाबाजी के शिष्य हैं जो जाति-पांत में अखंड भरोसा रखने वाले स्वामी रामभद्राचार्य जी के शिष्य हैं। इसलिए सभी को पता है कि धीरेन्द्र के मन में जाति-पांत की जड़ें कितनी गहरी हैं ? उनके गुरु तो ब्राम्हणों में भी ऊंच-नीच की बात करते हैं। बाबा धीरेन्द्र को सबसे पहले अपने गुरूजी को जाति-पांत की बीमारी से मुक्त करना चाहिए था। लेकिन बाबा तो बाबा होते हैं। बर्र और बालक का एक जैसा स्वभाव होता है। बाबा धीरेन्द्र भी शास्त्री कम, बर्र ज्यादा हैं। ' बर्र ' समझते हैं न आप ? बुंदेलखंड और अवध में ' बर्र ' एक ऐसा कीट है जो बहुत आक्रामक होता है ।  आदमी पर टूट पड़े तो जान तक ले ले।  अभी हाल हमें शिवपुरी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके भक्तों पर हमला कर दिया।
मजे की बात ये है कि  एक तरफ बाबा [बालक ] धीरेन्द्र शास्त्री जाति-पांत की मुखालफत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ शंकराचार्य अवमुक्तेश्वरानद का कहना है कि  यदि जाति ही समाप्त हो गयी तो फिर हमारी पहचान ही समाप्त हो जाएगी ।  सनातन ही समाप्त हो जाएगा ,जाति है तो ही हम सनातन हैं। अब पहले बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानद से ही शास्त्रार्थ कर लेना चाहिए। जो जीतेगा ,लोगउसकी बात मान लेंगे। इस शास्त्रार्थ में एक और ठठरी बाँधने वाले बाबा धीरेन्द्र शास्त्री होंगे और दूसरी और गठरी बांधकर चलने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानद। कितना मोहक दृश्य होगा। आपको याद होगा कि  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानद पहले भी बाबा धीरणेद्र शास्त्री से जोशी मठ को धंसने से रोकने की चुनौती दे चुके हैं।
वैसे हमारे यहां कहते हैं कि  - कांटे से ही काँटा निकलता है। ठीक उसी तरह बाबा की काट बाबा ही हो सकता है। बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को पहली बार शंकराचार्य बाबा मिले हैं ज्ञान देने के लिये ।  आप कह सकते हैं कि  बाबा ऊँट पहली बार पहाड़ के सामने आया है। बाबा धीरेन्द्र शास्त्री की मेहनत को देखते हुए मै तो भाजपा हाईकमान को मश्विरा दूंगा कि  बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को अविलम्ब यूपी या एमपी की कमान सौंप दिया जाना चाहिए। भाजपा को राजकाज के लिए बाबाओं की ही तो जरूरत है। वैसे भी भाजपा हाईकमान ने अपने आधे से ज्यादा नेताओं को  बाबा बना ही दिया है,जनता को बाबा बना   दिया है।  ।  बेचारों के पास भोजन और भजन करने के अलावा कोई दूसरा काम है ही नहीं।  सारा काम -तमाम तो मोदी -शाह की जोड़ी पहले से कर ही रही है।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री की प्रतिभा का देश कायल है। भाजपा कायल है । कमलनाथ कायल हैं,दिग्विजय सिंह कायल है।  संजय दत्त कायल हैं ,लेकिन हम कायल नहीं तो इसी उनकी सेहत पर क्या फर्क पड़ता है ।  शास्त्री की प्रतिभा से हमारे देश के ए-वन यानी मुकेश अम्बानी भी कायल है ।  अम्बानी ने अपने बेटे की शादी में धीरेन्द्र   को बुलाने के लिए अपनी चीलगाड़ी  [हवाई जहाज ] तक भेजी थी। बाबा धीरेन्द्र को प्रदेश की सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराकर वीआईपी बना ही दिया है। लेकिन बाबा असल में हैं हमारी ही तरह एक बुंदेलखंडी। हम बुन्देलखंडियोंके बारे में एक कहावत है की सौ डंडी और एक बुंदेलखंडी बराबर होता है। इसलिए दुसरे बाबाओं को धीरेन्द्र से सावधान होना चाहिए।  मै बाबा धीरेन्द्र की सनातन हिन्दू यात्रा का तो समर्थक नहीं हूँ लेकिन यदि वे हमारे साथ पृथक बुन्देखण्ड   राज्य आंदोलन का समर्थन करने के लिए कोई पदयात्रा निकालें तो हम उनको अपने  साथ ले सकते हैं।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ने कोई एक सौ किलोमीटर की पदयात्रा की है और इसी में फसूकर डाल दिया। उनके पांवों में फलका [छाले ] पड़ गए, बुखार आ गया ,जबकि हम जैसे लोग दो-दो बार 200  किमी की यात्रा कर चुके हैं वो भी बिना हो -हल्ला किये। हमारी ग्वालियर से करौली तक की यात्रा में हम थे ,हमारे मित्र थे और रिश्तेदार थे। हम हिन्दू जागरण के लिए नहीं बल्कि देवी दर्शन के लिए यात्रा पर थे। बहरहाल बाबा धीरेन्द्र शास्त्री दीर्घायु हो,स्वस्थ्य-प्रसन्न रहे। घरबार बसाये और डॉ मोहन भागवत की बात मानकर दस-पांच बच्चों का पिता बने तो शायद हिन्दुओं का कल्याण हो जाये।
@ राकेश अचल 

सोमवार, 25 नवंबर 2024

उत्पन्ना एकादशी व्रत हस्त नक्षत्र,सौम्य और प्रीति योग में


यूं तो हर माह में दो एकादशी आती है एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में इस प्रकार पूरे एक वर्ष भर में 24 एकादशी आती है ।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि हर एकादशी तिथि का अपना-अपना महत्व होता है इसी प्रकार उत्पन्न एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है।

एकादशी का व्रत  मार्गशीर्ष  माह कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि को व्रत किया जाता है इस व्रत में भगवान श्री कृष्ण जी की, विष्णु जी, लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। व्रत रखने वाले को दशमी तिथि के दिन रात में  भोजन नहीं करना चाहिए  दिन अस्त होने से पहले ही कर लेना चाहिए।

और एकादशी के दिन ब्रह्म बेला में भगवान कृष्ण भगवान, विष्णु और लक्ष्मी जी की पुष्प, जल, अक्षत ,धूप,दीप से पूजन करके पूजा अर्चना प्रार्थना करनी चाहिए। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश त्रिदेवों का संयुक्त अंश माना जाता है।इस एकादशी का व्रत   मोक्ष देने वाला व्रत कहा जाता है और अनेक पापों को नष्ट करता है।

 जैन ने बताया कि एकादशी तिथि 25 नवंबर की रात्रि यानी 26 नवंबर को रात 01:01 बजे  पर प्रारंभ होगी और यह 26 नवंबर की रात्रि 27 नवम्बर की रात 03:45 पर समाप्त होगी 26 नवंबर मंगलवार को पूरे दिन उदय काल में यह तिथि हस्त नक्षत्र सौम्य योग और प्रीति योग में रहेगी इसी दिन मंगलवार के दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत होगा इसके दूसरे दिन 27 नवंबर बुधवार को हरी वासर समाप्त होने का समय 10:26 बजे प्रातः है।

इस समय के उपरांत इस व्रत का पारण  करना चाहिए । पारण का  समय दोपहर 01:09 से 03:17 बजे तक रहेगा। पारण को द्वादशी तिथि  समाप्ति होने  से पहले करना अति आवश्यक है।

बुधवार, 20 नवंबर 2024

सनातन धर्म की रक्षा करना हर हिंदू का परम धर्म - पंडित घनश्याम शास्त्री

 

ग्वालियर।बहोड़ापुर स्थित 24 बीघा गालव नगर में आयोजित संगीतमय भागवत कथा में पहले  दिन सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने बताया कि  प्रत्येक व्यक्ति अपने कल्याण के लिए स्वयं ही उत्तरदायी है। व्यक्ति को चाहिए कि वह स्वयं को पहचान कर अपने कल्याण का मार्ग चुने।

शास्त्री जी ने आगे कहा कि सनातन धर्म का संरक्षण और उसकी रक्षा करना हर हिंदू का परम धर्म है। सनातन धर्म, जिसमें आदिकाल से ही मानवता, प्रेम और करुणा का पाठ पढ़ाया गया है, का पालन और रक्षा करना हमारा कर्तव्य है

महाराज जी ने कहा कि यदि धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने की आवश्यकता हो, तो इसे भी हंसते-हंसते स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि हमारे पूर्वजों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, और यही मार्ग हमें भी दिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए हम किसी भी प्रकार के त्याग के लिए तैयार रहें इस अवसर पर कथा परीक्षित वर्षा मुनेश श्रीवास्तव, विनोद भार्गव, जिला महामंत्री भावना जालौन मुरैना,हरिओम शर्मा ने भागवत जी की आरती की।

गुरुवार, 14 नवंबर 2024

कार्तिक पूर्णिमा 15 नवम्बर को

धार्मिक दृष्टि से अति महत्व पूर्ण दिवस

कोई कोई महीना ,दिन, तिथि स्नान, दान,धर्म करने की दृष्टि से बड़ा महत्व पूर्ण होता है कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा का दिन भी इस दृष्टि से विशेष रूप से महत्व पूर्ण है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि 15 नवम्बर को प्रातः 06:19 बजे से प्रारंभ होगी और पूरे दिन रहते हुए रात्रि 02:58 बजे तक रहेगी।

उदया तिथि होकर पूरे दिन के समय रहने से कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर गंगा स्नान, दीप दान,अन्य दान आदि का विशेष महत्व रहेगा।

इस दिन अनेक पर्व रहने से त्रिदेवों ने इसे महा पुनीत पर्व कहा है।

इस दिन ही कार्तिक स्नान का आरंभ जो शरद पूर्णिमा से हुआ उसका समापन होता है। देव  प्रबोधिनी एकादशी से आरंभ होने वाले तुलसी विवाह उत्सव का समापन भी कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि को होता है इसी दिन तुलसी देवी और शालिग्राम के विवाह अनुष्ठान का आयोजन । भीष्म पंचक व्रत जो देव प्रबोधिनी एकादशी से आरंभ होता है उसका समापन होता है। एक दिन पूर्व  14 नवंबर को वैकुंठ चतुर्दशी व्रत पूजन किया जाता है।

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली भी मनाई जाती है जिसे देवताओं के दीपावली उत्सव के रूप में जाना जाता है शिव जी द्वारा त्रिपुरा नामक राक्षस को परास्त करने से इसे त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

इस दिन जैन समाज द्वारा अष्टांहिक पर्व कार्तिक शुक्ल अष्टमी से जगह जगह हर शहर में चल रहे होते है उन अष्टांहिक विधान पर्व का समापन भी इसी दिन किया जाता है।

जैन ने कहा कि इस दिन गांग जी में या सरोवर में  स्नान नहीं कर सकते तो  घर पर ही गंगा जल युक्त जल से स्नान व्रत,दान,मंत्र जाप पाठ अवश्य करना चाहिए।

मंगलवार, 12 नवंबर 2024

देवउठनी एकादशी से फिर शुरू हो जाएंगे विवाह

 केवल एक ही शुद्ध विवाह मुहूर्त

धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है यह भगवान विष्णु को समर्पित है कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देवठान एकादशी व्रत रखा जाता है कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देव उठानी एकादशी कहते हैं इसे प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी नाम से ही जाना जाता है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार देवउठनी एकादशी 12 नवंबर मंगलवार को है मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से 4 महीने बाद जागते हैं और सृष्टि का फिर से संचालन करते हैं। आषाढ शुक्ल एकादशी बुधवार  17 जुलाई के दिन  भगवान विष्णु योग निद्रा में चले गए थे और अब कार्तिक शुक्ल एकादशी 12 नवंबर मंगलवार के दिन जागरण होगा। जाइसलिए इस दिन से ही चातुर्मास काल  भी समाप्त होगा और विवाह गृह प्रवेश आदि शुभ मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाएगी । 

 देव उठानी एकादशी का शुभ मुहूर्त:-  

 एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 06:40 बजे से आरंभ होगी और एकादशी तिथि का समापन 12 नवंबर को शाम 04:04 पर होगा।

 देव उठानी एकादशी पर बना रहे हैं कुछ शुभ योग:- जैन ने कहा  देव उठानी एकादशी मंगलवार को  इस वर्ष रवि योग , सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बना रहे हैं पंचांग में इन योगों को अत्यंत शुभ और लाभदायक माना गया है ।

रवि योग सुबह 06:40 से 07:52 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:52 से दूसरे दिन 05:50 तक रहेगा।

 पूजन के शुभ मुहूर्त प्राप्त है 05:21 से 06:41 तक 

अभिजीत दोपहर 11:43 बजे से 12:36 बजे तक विजय मुहूर्त दोपहर 01:00 बजे  से 02:35 बजे तक 

गोधूलि बेला  शाम 05:28 से 05:54 तक संध्या 05:58 बजे  से 06:45 बजे तक रहेंगे। एकादशी पारण का दिन 13 नवंबर बुधवार को  सुबह पारण का समय 06:42 से 08:51 बजे तक रहेगा।

*विवाह मुहूर्त*:-

जैन ने कहा कि इस बार 15 जनवरी 2025 तक देव उठानी एकादशी के अबूझ मुहूर्त को छोड़कर एक या दो ही शुद्ध विवाह मुहूर्त है अन्य विवाह मुहूर्त  दोष सहित अशुद्ध मुहूर्त है।

शुद्ध विवाह मुहूर्त :- नवंबर में केवल 22 नवंबर 

दिसंबर में  केवल 02 दिसंबर ही है। फिर सीधे जनवरी 25 में है।

जनवरी 25 में- 16,17,18,21,22

फरवरी में - 071,13,14,18,20,21,25

मार्च 25 में - 05,06

अप्रैल 25-14,16,18,19,20,25,29,30, 

मई  25-  05,06,07,08,17,28

जून 25 - 01,02,04,07,08

 फिर सीधे नवंबर 2025 में 22,23,25,30

दिसंबर 25 में 04,11,12, है।

अशुद्ध विवाह मुहूर्त :-

नवंबर 2024 में 16,17,25,26,27,28 है। दिसंबर 2024 में 04,08,09,10,13,14 है।

शनिवार, 26 अक्टूबर 2024

दीपावली ,महालक्ष्मी पूजन 1 नवम्बर स्वाति नक्षत्र, गद योग में शुभ रहेगा

दीपावली महालक्ष्मी पूजन को लेकर पूरे देश में विद्वानों की अलग-अलग राय चल रही है इस बार अधिकतर त्यौहार तिथियों के फेर में बने रहे।

आइए जाने  दीपावली, लक्ष्मी जी का पूजन 31 अक्टूबर को करे अथवा 1 नवंबर शुक्रवार  को पूजन करना श्रेष्ठ है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए कहा की 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि 15:52 पर प्रारंभ होगी और 01 नवंबर शुक्रवार को शाम को 6:16 तक रहेगी इसलिए संपूर्ण भारत में 31 अक्टूबर की प्रदोष व्यापिनी है परंतु शास्त्र इस संदर्भ में कहते हैं।  01 नवंबर को स्वाति नक्षत्र सूर्योदय से रात्रि 3:30 तक रहेगा। शुक्रवार को स्वाति नक्षत्र होने से गद योग बन रहा है। साथ ही दिन के 10:40 बजे से आयुष्मान योग रहेगा। 01 नवंबर को अमावस्या तिथि उदय व्यापिनी  होने के साथ साथ प्रदोष को भी स्पर्श कर रही है।

 प्रदोष समय में दीपदान ,लक्ष्मी पूजन करना चाहिए अमावस्या तिथि पहले दिन और दूसरे दिन दोनों दिन ही प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन वाली अमावश्या में ही लक्ष्मी पूजन करना शास्त्र सम्मत है। प्रतिपादक ग्रहण करना चाहिए। निर्णय सिंधु के प्रथम परीक्षित के प्रश्न 26 पर निर्देश है कि जब तिथि दो दिन कर्मकाल में विद्यमान हो तो निर्णय युगमानुसार अनुसार करें इस हेतु अमावस्या प्रतिपदा का युग्म शुभ माना गया है ।अर्थात अमावस्या को प्रतिपदा युता ग्रहण करना महाफलदायक होता है और लिखा भी है पहले दिन चतुर्दशी होता अमावस्या ग्रहण करें तो महादोष है और पूर्व के किए पुण्य को नष्ट करने वाली होती है दीपावली निर्णय प्रकरण में धर्म सिंधु में लेख है कि  सूर्योदय में व्याप्त होकर अस्तकाल के उपरांत एक घटिका  से अधिक व्यापिनी अमावस्या होवे तब संदेह नहीं करना चाहिए इस अनुसार 01 नवंबर को दूसरे दिन सूर्योदय में व्याप्त होकर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में एक  से अधिक अमावस्या विद्यमान है निर्णय सिंधु के द्वितीय   परिच्छेद के पृष्ठ तीन सौ पर लेख है कि  यदि अमावस्या दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी होवे तो   अगली करना।

 कारण की तिथि तत्व में ज्योतिषी का कथन है एक घड़ी रात्रि का योग होवे तो अमावस्या दूसरे दिन होती है तब प्रथम दिन को छोड़कर अगले दिन सुखरात्रि होती है।

 तिथि निर्णय का कथन उल्लेखनीय है कि अमावस्या दोनों दिन प्रदोष को स्पर्श न करें तो दूसरे दिन ही लक्ष्मी पूजन करना चाहिए इसमें यह अर्थ भी अंतर्निहित है कि अमावस्या  दोनों दिन स्पर्श करें तो  लक्ष्मी पूजन दूसरे दिन हीं करना चाहिए 

 व्रत पर्व विवेक में दीपावली के संबंध में अंत में निर्णय प्रतिपादित करते हुए लिखा है कि अमावस्या के दो दिन प्रदोष काल में व्याप्त / अव्याप्त होने पर दूसरे दिन लक्ष्मी पूजन होगा इस प्रकार उपरोक्त सभी प्रमुख ग्रंथो का साथ यह है यदि अमावस्या दूसरे दिन प्रदोष काल में एक घाटी से अधिक व्याप्त है तो प्रथम दिन प्रदोष   में संपूर्ण व्याप्ति को छोड़कर दूसरे दिन प्रदोष काल में श्री महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए किंतु कहीं भी ऐसा लेख नहीं मिलते  कि दो दिन प्रदोष में व्याप्ति है तो अधिक व्याप्ति वाले प्रथम दिन लक्ष्मी पूजन किया जाए ।

प्रतिपदा युता अमावस्या ग्रहण किए जाने का युग्म का जो निर्देश है उसके अनुसार भी प्रदोष काल का स्पर्श मात्र ही पर्याप्त है यदि एक घटी से कम व्याप्ति होने के कारण प्रथम दिन ग्रहण किया जाता है तो वह युग्म व्यवस्था का उल्लंघन होकर महादोष  कारक है पंचांग कर्ताओ के मत के अनुसार राजधानी पंचांग, ब्रजभूमि पंचांग, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक चलने वाला निर्णय सागर पंचांग, राजस्थान का शिव शक्ति  पंचांग आदि पंचांग में भी एक नवंबर को दीपावली पूजन मुहूर्त का उल्लेख किया है।

सबसे सरल सूत्र जिन शहरों में सूर्यास्त शाम को 05:52 के बाद होगा उन में अमावस्या तिथि सूर्यास्त अनन्तर एक घटी  से  कम होने के कारण 31 को कर सकते हैं ऐसे शहर भारत के व मुश्किल से 7 % शहर आयेंगे शेष दिल्ली,हिमाचल प्रदेश,हरियाणा, उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश ,झारखंड, मेघालय,बांग्लादेश, कोलकाता उड़ीसा,तेलंगाना,जयपुर,

ग्वालियर,झांसी,आदि अनेक शहर 90 % भारत के शहरो में 01 नवंबर को दिवावली पूजन करना शास्त्र सम्मत है।

एक मानचित्र से भी समझे। 


ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ग्वालियर

गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

भारतीय ज्योतिषियों की बलिहारी

 

मेरा ज्योतिष में किंचित क्या रत्ती भर विश्वास नहीं है ,लेकिन मेरे विश्वास करने और न करने से क्या फर्क पड़ता है। देश की बहुसंख्यक जनता का विश्वास तो है ज्योतिष पर। और इसी विश्वास के सहारे देश का कारोबार ,बाजार चलता आ रहा है। ज्योतिषी जब बताते हैं तब हमारे यहां नेता चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करते है।  हम खुद ज्योतिषी के बताये मुहूर्त पर गृह प्रवेश करते है।  और तो और भाँवरें डालते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि हम खरीद-फरोख्त भी ज्योतिषियों द्वारा बताये गए महूर्त के हिसाब से ही करते हैं।

मैंने जब से होश सम्हाला है तब से देखता आ रहा हूँ  कि हमारे भारतीय ज्योतिषी मुहूर्तों के बारे में पूछने पर ही बताते हैं और वो भी दक्षिणा   लेने के बाद।  वे पत्रा /पंचांग तभी खोलते हैं जब चढ़ौती चढ़ा दी जाय।   लेकिन खरीद-फरोख्त के लिए शुभ मुहूर्त बताते हुए ज्योतिषी किसी से कोई दक्षिणा नहीं मांगते । बस बता देते हैं कि कब मकान खरीदना है ,कब सोना-चांदी खरीदना है ,कब वाहन खरीदना है। त्यौहार के मौसम में ज्योतिषी ऐसे -ऐसे दुर्लभ मुहूर्त बताते हैं की जनता बावली हो जाती है। जनता को बाबला कर ये ज्योतिषी बाजार की बल्ले-बल्ले करा देते हैं। एक ही दिन में साल-छह महीने का कारोबार हो जाता है। लगता है कि बाजार कि और ज्योतिषियों कि कोई दुरभि संधि है।

हम उन लोगों में से हैं जो अपना हर काम 'अबूझ  मुहूर्त ' में करते है।  ज्योतिषियों के बताये मुहूर्त के फेर में नहीं पड़ते ,इसीलिए चाहे जितना दुर्लभ मुहूर्त हो हम बाजार की और रुख नहीं करते ।  हालाँकि हमारे घर में दूसरे लोग नजर बचाकर बाजार से खरीदारी कर लेते हैं लें हम धनतेरस को भी चम्मच/ घंटी से ज्यादा कुछ नहीं खरीदते। खरीदना भी नहीं है क्योंकि ज्योतिषी तो साल में दस बार दुर्लभ मुहूर्त बताते है।  यदि उनके हिसाब से खरीदारी करने लगे तो घर का बजट ही फेल हो जाये।

अब इस साल ही देख लीजिये। ज्योतिषियों ने कहा है की इस साल 24  अक्टूबर को जो दुर्लभ मुहूर्त बना है वो आज से 752  साल पहले बाना था। कमाल की बात है न कि जब दुनिया में कम्प्यूटर नहीं जन्मा था तब भी हमारे ज्योतिषियों का गुणा-भाग चलता था और उन्हें आज भी कम्प्यूटर नहीं बल्कि उनका अपना पत्रा/ पंचांग ही सैकड़ों साल पुराने मुहूर्त के बारे में बता देता है। मुझे कभी-कभी लगता है कि देश की असली सेवा हमारे ज्योतिषी ही करते हैं ,लेकिन कभी-कभी इनके ऊपर शक भी होता है , क्योंकि ये ज्योतिषी आजतक ये नहीं बताये कि देश के ' अच्छे दिन कब आएंगे ?

आपको बता दूँ कि मै जिस शहर में रहता हूँ वो एक बड़े गांव जैसा ही ह। महाराजाओं का शहर है। यहां न सिटी बस है और न मेट्रो रेल।  लेकिन वहां भी इस मुहूर्त के फेर में एक दिन में एक हजार वाहनों की खरीद हो गयी ।  मकान खरीदने वालों को मुहूर्त के हिसाब से रजिस्ट्री करने के लिए मुंह-मांगी रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्या पता कि मुहूर्त निकलने के बाद खरीदारी लाभप्रद हो या न हो। हमारे यहां आदमी धर्मभीरु   ही नहीं ज्योतिष-भीरु भी है। ज्योतिषी नट की तरह देश की सीधीसादी  जनता को अपने इशारे पर नचाते हैं। जनता  कभी नहीं सोचती   कि ये दुष्ट ज्योतिषी उनके भले के लिए नहीं बल्कि बाजार के भले के लिए ख़ास मुहूर्त निकलकर अखबारों में ,टीवी चैनलों पर दिखाते हैं। जनता तो ठहरी आँख की अंधी  और नाम नयनसुख वाली। अपने दिमाग की खिड़कियां और दरवाजे कभी खोलती ही नहीं।चाहे चुनाव हो या भागवत कथा।  देश की जनता कभी इन ज्योतिषियों से पूछती ही नहीं कि दुर्लभ योग में उन्होंने अपने लिए क्या खरीदा ?

ज्योतिषी बड़े चतुर  -सुजान होते हैं।  जनता को किश्तों में उलूक बनाते हैं। इस साल  उन्होंने वृषभ ,कन्या और तुला राशि के जातकों को चुना। कहा कि इन राशियों के लोग यदि 752  साल बाद पड़ने वाले दुर्लभ योग का लाभ उठाना चाहते हैं जो हनकर यानि जमकर दरियादीली से खरीद-फरोख्त करें ।  ईडी ,सीबीईआई की फ़िक्र न करें।

चूंकि ये मुहूर्त केवल हिन्दू पंचांगों में से निकलते  हैं इसीलिए ये हिन्दुओं के लिए ही शुभ होते है।  मुसलमान,ईसाई या दूसरे धर्मों के लोगों के लिए नहीं।  हामिद  को तो आज भी अपनी अम्मी के लिए बाजार से चिमटा ही खरीदना पड़ता है। देश के 85  करोड़ लोग तो उस मुहूर्त को ही शुभ मानते हैं जिस  दिन उन्हें पांच किलो मुफ्त का अन्न मिलता है।  लाड़ली बहिनों के लिए तो केवल वो मुहूर्त शुभ होता है जिस दिन उनके खाते में सरकार 1250  रूपये राखी बंधन के नेग के रूप में डाल देती है।

हमारा दुर्भाग्य ये है कि हम लोग चाहकर भी इन ज्योतिषियों की भविष्यवाणीयों को चुनौती देने देश की किसी छोटी या बड़ी अदालत नहीं जा सकता ।  जैसे-तैसे पहुँच भी जाएँ तो वहां हमें सुनेगा कौन ? अदालतों में भी तो आखिर धर्मभीरु/ मुहूर्त   प्रेमी लोग ही विराजते हैं। हमारे देश के मुख्यन्यायाधीश ने खुद रहस्योद्घाटन किया कि वे जब भी किसी बड़े मामले में फैसला करने वाले होते हैं भगवान की शरण में चले जाते हैं। देश का कोई ज्योतिषी वही गुरु,अल्लाह या जीसस की शरण में कभी गया हो तो हमें पता नहीं। कहने का आशय ये है कि जिस देश में कार्यपालिका,विधायिका और न्यायपालीका तक भगवान के भरोसे काम करती हो उस देश में आखिर ज्योतिषियों का तम्बू कौन उखाड़ सकता है ? इन्हें तो  सर्वदलीय समर्थन हासिल होता है।  किसी भी दल   की सरकार हो कोई इनके खिलाफ जाने वाला नहीं है। क्योंकि सभी की दुकानदारी  में ज्योतिष की अहम भूमिका है।

आप मुझे ज्योतिष शास्त्र कहें या विज्ञान कहें का विरोधी न माने ।  निंदक न मानें। मुझे तो अपने सनातन ज्ञान पर गर्व है। इसी के चलते सहमत न होते हुए मै जिस अखबार में काम करता था उसके पंडित जी यदि किसी दिन भविष्यफल भेजने में आलस करते थे तो मैं खुद उनकी और से भविष्यफल लिखकर छाप लेता था ।पाठकों का मन जो रखना होता था।   मैने जिस स्थानीय न्यूज चैनल में काम किया उसके दर्शकों के लिए खुद कंठीमाला पहनकर ज्योतिषी की भूमिका अदा की।आजकल चैनलों में अभिनय ही तो प्रधान है।  आखिर जनता की आँखों में धूल ही तो झोंकना है नेताओं की तरह। जनता की आँखों में धूल झोंकना सबसे आसान काम और सबसे अधिक ललितकला है। इसलिए आप भी मेरे कहने से  752  साल बाद बने इस सौभग्यशाली मुहूर्त की अनदेख न करें। खरीदारी करे। क्रेडिट कार्ड से करें ,परसनल   लोन लेकर करें ,कढ़ुआ[ कर्ज लेकर ] काढ़कर करें। खरीदारी जरूर करें ,क्योंकि इसी से तो आपका भाग्य चमकने वाला है।  जय श्री राम

@ राकेश अचल

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